एंटीवेनम का निर्माण कैसे किया जाता है?

कृपया यह बताने की कृपा करें कि एंटीवेनम का उत्‍पादन किस प्रकार से किया जाता है। (सुमित सक्‍सेना, दरभंगा, बिहार)

स्‍नेक एंटीवेनम के उत्‍पादन के लिए सर्वप्रथम सांपों के ज़हर को निकाला जाता है। (सांपों के ज़हर को निकालने की विधि जानने के लिए यहां पर क्लिक करें

ज़हर को निकालने के बाद उसे मानइस 20 डिग्री सेल्सियस पर जमा दिया जाता है। उसके बाद वेनम से पानी को निकाल कर अलग कर दिया जाता है। इससे सांप का वेनम सूख कर ठोस रूप में परिवर्तित हो जाता है और उसे स्‍टोर करने और आवश्‍यकतानुसार इधर से उधर ले जाने में सुविधा होती है। 

एंटीवेनम के निर्माण के लिए इसके बाद इम्‍यूनाइजेशन की प्रक्रिया प्रारम्‍भ होती है, जिसमें उचित जानवर का चुनाव करके उसके शरीर में सूक्ष्‍म मात्रा में ज़हर का प्रवेश कराया जाता है। इस क्रिया के लिए घोड़े को सबसे उचित माना गया है। हालांकि कभी-कभी बकरी और भेड़ भी इस कार्य के लिए उसयोग में लाई जाती हैं, लेकिन सर्वाधिक उपयोग घोडों का ही किया जाता है। 

इम्‍यूनाइजेशन क्रिया को प्रारम्‍भ करने के पहले वेनम में डिस्टिल्‍ड वाटर और कुछ अडजुवन्‍ट केमिकल को मिला दिया जाता है। इससे उस जानवर का इम्‍यून सिस्‍टम बेहद सक्रिय हो जाता है और तेजी से एंटीबॉडीस का निर्माण करने लगता है। 

तैयार वेनम के घोल की बेहद सूक्ष्‍म मात्रा (एक या दो मिलीलीटर) को घोडे के रम्‍प (rump) अथवा गर्दन के पिछले हस्‍से पर इंजेक्‍शन के जरिए उसकी त्‍वचा में प्रवेश करा दिया जाता है और उसे सघन चिकित्‍सीय परीक्षण में रखा जाता है। 

लगभग 8 से 10 सप्‍ताह में घोड़े रक्‍त में भरपूर मात्रा में एंटीबॉडीस का निर्माण हो जाता है। ऐसी अवस्‍था में घोड़े का रक्‍त निकाल कर उसे प्रयोगशाला में संवर्धित करके उसमें से एंटीबॉडीड को पृथक कर लिया जाता है और उससे एंटीवेनम इंजेक्‍शन का निर्माण किया जाता है। यह इंजेक्‍शन शुष्‍क रूप में होते हैं, जिन्हें फ्रिज में बेहद निम्‍न तापमान पर रखा जाता है और आवश्‍यकता पडने पर saline solution मिलाकर उपयोग में लाया जाता है। 

एंटीवेनम निर्माण की प्रक्रिया को दर्शाता वीडियो देखें:
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सांप का ज़हर कैसे दुहते हैं ?


प्रयोगशालाओं में अनगिनत प्रयोग करने पर यह पाया गया है कि यदि किसी जानवर के खून में थोड़ा थोड़ा करके सांप का ज़हर सुई देकर प्रविष्ठ कराया जाए और रोज इस विष की मात्रा क्रमश: बढ़ाई जाए, तो कुछ ही दिनों में उस जानवर के खून में यह गुण आ जाएगा कि यदि उसे सचमुच कोई सांप काट ले, तब भी उसे कुछ न हो। ऐसी दशा में पहुंचे जानवर के खून से ही सांप का जहर मारने वाला 'सीरम' (Snake Antivenom) तैयार किया जाता है।

इस सीरम को तैयार करने के लिए वास्तव में सैंकड़ों स्वस्थ सांपों की जरूरत होती है। इन सांपों को शीशे के हवादार बक्सो में पाला जाता है और समय—समय पर उनका जहर निकाल कर आगे की प्रक्रिया सम्पन्न करने के लिए प्रयोगशाला में भेज दिया जाता है।

भारत में इस प्रकार की एकमात्र प्रयोगशाला मुम्बई में है, जिसे 'हाफकिन इंस्टीट्यूट' (Haffkine Institute, Mumbai) के नाम से जाना जाता है। यहां पर लगभग 200 प्रकार के सांपों को पाला जाता है और सावधानीपूर्वक उनका जहर निकाला जाता है। इस इंस्टीट्यूट में यूं तो भारत में पाए जाने वाले लगभग सभी प्रकार के जहरीले सांप पाले जाते हैं, किन्तु 'करैत' सांप (Krait Snake) नहीं मिलता है। क्योंकि करैत सांप की प्रकृति इस तरह की होती है कि यदि उसे कैद करके पिंजड़े में रखा जाए, तो वह कुछ ही दिनों में मर जाता है।

सांप का जहर निकालने के लिए उसे एक छड़ी की मदद से बाहर निकाला जाता है और फिर उसे सावधानी से मुंह के पास पकड़कर एक बारीक झिल्‍ली चढ़े शीशे के प्‍याले के पास लाया जाता है। सांप गुस्‍सते में जोरों से प्‍याले में अपने दांत गड़ाने की कोशिश करता है, जिससे उसका जहर प्‍याले में इकट्ठा हो जाता है। इस प्रक्रिया से जहर निकालने पर प्‍याले में सांप के मुंह का फेन भी इकट्ठा हो जाता है, जिसे बाद में अलग कर दिया जाता है।

अमेरिका में वैज्ञानिकों ने विद्युत धारा के द्वारा सांप का जहर निकालने की विधि ईजाद की है। इस विधि में सांप के सिर पर 10 वोल्‍ट की शॉक दिया जाता है, जिससे उसके विष ग्रन्थि सम्‍बंधी स्‍नायु प्रभावित होते हैं और उनमें संकुचन होने के कारण जहर अपने आप सांप के मुंह से बाहर आ जाता है। इस विधि का आविष्‍कार करने वाले डॉक्‍टर जान्‍सन का मानना है कि इससे सांपों को कोई तकलीफ नहीं होती, जबकि शीशे के प्‍याले में जहर निकालने की परम्‍परागत विधि में उन्‍हें बेहद तकलीफ सहनी पड़ती है।

प्रयोगशाला में सांप के विष को दुहने के बाद उसे कसौली, हिमांचल प्रदेश स्थित गवर्नमेन्‍ट प्रयोगशाला 'सेन्‍ट्रल रिसर्च इंस्‍टीट्यूट' (Central Research Institute, Kasauli) भेज दिया जाता है, जहां पर उसे शोधित करके एंटीवेनम का निर्माण किया जाता है। सांप के जहर से एंटीवेनम का निर्माण किस प्रकार किया जाता है, इस बारे में जानकारी अगली पोस्‍ट में...। (एक पाठक द्वारा पूछे गये प्रश्‍न के क्रम में)
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10 सबसे ज़हरीले भारतीय सांप (Top 10 Venomous Snakes In India)

(किंग कोबरा: सबसे ज़हरीला भारतीय सांप)
एक आंकड़े के अनुसार भारत में हर साल 46 हजार लोग सर्पदंश से मरते हैं (जबकि सरकारी आँकड़ा मात्र 20 हजार का है)। इसकी मुख्‍य वजह यह है कि न तो भारत में पाए जाने वाले ज़हरीले सांपों के बारे में पर्याप्‍त जानकारी है और न ही उनसे बचाव के तरीके ही मालूम हैं। सांपों से सम्‍बंधित जानकारियां यहां पर नियमित रूप से प्रकाशित की जाती रही हैं। 


इसी क्रम में आज भारत में पाए जाने दस सबसे ज़हरीले सांपों की जानकारी दी जा रही है। ये सांप इस प्रकार हैं: 


1. किंग कोबरा (King Cobra) King Cobra Snake
2. भारतीय कोबरा (Indian Cobra) Indian Kobra
3. रसल वाइपर (Russell's Viper) Indian Russel Viper
4. अलबीनो रसल वाइपर (Albino Russell's Viper)
5.  बेन्‍कड करैत (Banked Krait) Banked Karait
6. इंडियन करैत (Indian Krait) Indian Carait
7. सॉ-स्‍केल्‍ड वाइपर (Saw-Scaled Viper) 
8. ग्रीन बैम्‍बू पिट वाइपर (Green Bamboo Pit Viper)
9. मालाबार पिट वाइपर (Malabar Pit Viper)
10. हम्‍प नोस्‍ड पिट वाइपर (Hump-Nosed Pit Viper)

इन सांपों को सचित्र देखने के लिए आप इस वीडियो का सहारा ले सकते हैं।
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Snake bite? Don't Panic, Just Do it R.I.G.H.T.’

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण  विभाग ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुझाव पर विगत 2007 में एक कार्यशिविर जिसमें जाने माने सर्प विज्ञानी इकट्ठा हुए थे के सहयोग से एक 'सर्पदंश चिकित्सा प्रबन्ध प्रोटोकाल' को अंतिम रूप दिया था जो फाईलों में दबा  रहा है- उसी के एक महत्वपूर्ण अंश को यहाँ सर्प संसार के पाठकों के सामने लाये हैं विज्ञान  लेखक और ब्लॉगर अभिषेक मिश्र।



सर्पदंश चिकित्सा प्रबन्ध प्रोटोकाल:
भारत के लिए सुझाई विधि को इस सूत्र द्वारा अभिव्यक्त किया गया है– ‘Do it R.I.G.H.T.’
जहाँ R= Reassure the patient यानि पीड़ित को आश्वस्त करना।

(लगभग 70 % सर्पदंश की घटनाएँ गैर जहरीले साँपों द्वारा ही होती हैं, और जहरीले साँपों के काटने से भी प्राणघातक घटनाएं लगभग 50 % ही होती हैं।)

I= Immobilize in the same way as a fractured limb यानि प्रभावित अंग में गतिशीलता न आने देना। और उसे वैसा ही स्थिर बनाएं रखने के लिए उपाय करना जैसा फ्रैक्चर होने पर पट्टी बाँध कर करते हैं -यानि बांस की फलटी आदि से काटे हिस्से को सपोर्ट कर स्थिर कर देना

अक्सर बदहवासी और भागदौड़ की वजह से साँप का जहर तीव्रता से शरीर में फैल प्राणघातक बन जाता है, प्रभावित अंग की गतिशीलता को कम कर जहर के प्रसार की गति नियंत्रित कर प्राणों के लिए बहुमूल्य समय बचाया जा सकता है।

GH= Get to Hospital Immediately यानि तुरंत अस्पताल ले जाना

सर्पदंश से बचाव की परंपरिक विधियाँ जैसे ओझा सोखा ,खरबिरैया या जड़ी बूटी इस दिशा में ज्यादा प्रभावी नहीं पाईं गई हैं। इसलिए इन निरर्थक प्रक्रियाओं में विलंब न कर तत्काल अस्पताल ले जाना ही उचित है।

T= Tell the doctor of any systemic symptoms यानि डौक्टर को वो सारे क्रमिक लक्षण बताना जो उस तक लाने से पूर्व पीड़ित में देखे गए हैं।

यहाँ उल्लेखनीय है कि यदि काटने वाला साँप मारा गया हो तो उसे भी सटीक पहचान व तदनुकूल निर्णय के लिए अस्पताल ले जाया जाना उचित है। मगर साँप को मारने या पकड़ने में समय गँवाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए, वरना यह समय की बर्बादी के अलावे मरने वालों की की संख्या बढ़ा भी सकता है।
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ये 'विषखोपडा' क्या है और क्या यह सचमुच जहरीला है?

अक्सर अखबारों में यह समाचार छपता है कि जहरीले जंतु के काटने से मौत. और जानकारी मिलती है कि किसी 'बितनुआ' (विषखोपडा) नाम के जंतु के काटने से मौत हुयी है. ऐसे में पाठकों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर यह बितनुआ क्या है ? 

दरअसल बितनुआ कोई अन्य जीव जंतु न होकर मगरगोह का छोटा बच्चा ही होता है. गावों में अभी भी मगरगोह (बड़ी छिपकली जाति) और उसके बच्चे को अलग रूप रंग के चलते दो विभिन्न प्रजाति के प्राणी होने का दर्जा मिला है जो कि गलत है. मगरगोह तो अभी हाल तक पूरी तरह विषहीन जानवर माना जाता रहा है किन्तु हालिया खोजों में इसके लार में विष होने की पुष्टि हुयी है.

मेलबोर्न विश्वविद्यालय (Melbourne University) के ब्रायन फ्राई (Bryan Fry) नाम के वैज्ञानिक की अगुआई में शोधकर्ताओं की एक टीम ने यह हैरतंगेज जानकारी दी है कि अब तक जिन गोहों को विषहीन मानते रहे हैं दरअसल उनमें भी विष होता है.
 भारतीय गोह (साभार विकिपीडिया)

हमारे यहाँ बहुत कामन प्रजाति मगरगोह (Monitor Lizard) की है. तय है कि यह भी पूरी तरह विषहीन नहीं है। मगर यह भी सही है कि इनके लार में पाया गया विष मनुष्य को मारने में नाकाफी है. तब इसके बच्चे यानि 'बितनुआ' में तो और भी कम विष होगा. यद्यपि इनसे मनुष्य की जान तो नहीं जा सकती मगर अब ये पूरी तरह निरापद नहीं कहे जा सकते. 

भारत में इन गोहों को पालने की भी परम्परा रही है. इनके पंजों की पकड़ बड़ी मजबूत होती है. कहते हैं शिवाजी के सैनिक इनका उपयोग दुर्गम किलो पर चढ़ने के लिए करते थे. भारत में अब इन्हें वन्य जीव अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित जीव घोषित किया जा चूका है अर्थात इन्हें पालने पकड़ने पर अब पाबंदी है.
गोह का का बच्चा, जिसे गावों में बितनुआ कहते हैं!
अब अगली बार आपका सामना मगर गोह या उसके बच्चे "बितनुआ" (बीते भर का) से हो जाय तो थोड़ी सावधानी अपेक्षित है. इसलिए कि उसके काटने से उसकी लार का जहर आप पर आंशिक प्रभाव डाल सकता है और घाव भी जहर के चलते बुरी दशा में जा सकता है.
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बॉब्‍स पुरस्‍कार: 'सर्प संसार' ने लहराया रचनात्‍मकता का परचम।


सचमुच यह एक बड़ा अवसर है। बॉब्‍स द्वारा 'सबसे रचनात्‍मक' श्रेणी में विश्‍व की एक दर्जन भाषाओं से चुने गये प्रतिनिधि ब्‍लॉगों में से यूजर कटेगरी का पुरस्‍कार आपके प्‍यारे ब्‍लॉग 'सर्प संसार' को प्राप्‍त हुआ है। उसे इस श्रेणी में कुल 45 प्रतिशत वोट मिले हैं। 

इस अवसर पर कुछ प्रतिक्रियाएं आपकी नज़र हैं-

'फख्र की बात है हिन्दी के सर्प संसार ने दुनिया की दर्जन भर भाषाओं में से 'सबसे रचनात्मक और सृजनात्मक' कटेगरी का बाब्स यूजर पुरस्कार जीत लिया है। कौन कहता है हिन्दी कमजोर भाषा है? -डॉ0 अरविंद मिश्र

'World of Snakes' won the "The BOBs – Best of the Blogs - the world’s largest international Weblog competition-user winner award in "Most creative and original category" of online activism amongst a dozen languages of the world. I am happy, tremulous but exultant. This blog is written by me and Zakir Ali Rajnish! -Dr. Arvind Mishra

वहीं स्‍वयं बॉब्‍स संस्‍था भी 'सर्प संसार' के कार्यों से चमत्‍कृत है। उसने अपने ऑफशियल फेसबुक पेज पर इसके सम्‍बंध में लिखा है- 

'आप सभी को बधाई!
बर्लिन में हो रहे बॉब्स पुरस्कारों में हिंदी के ब्लॉग 'सर्प संसार' को यूजर्स की वोटिंग के आधार पर सबसे ज्यादा रचनात्मक ब्लॉग चुना गया है. यूजर्स ने हिंदी के इस ब्लॉग को बाकी सभी भाषाओं के ब्लॉग्स से बेहतर आंका. 

सांपों के बारे में दुनिया भर में कई किस्म की भ्रांतियां हैं, काल्पनिक भय हैं. सर्प संसार वैज्ञानिक ढंग से इन भ्रांतियों और भयों को तोड़ता है. ब्लॉग सांपों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी बड़े अच्छे ढंग से देता है. सांपों की पहचान, सांपों का मनोविज्ञान और उनकी दुनिया की जानकारी सरल और स्पष्ट ढंग से पाठकों तक पहुंचाई जाती है. यही वजह है कि हिंदी भाषा में लिखे जा रहे इस ब्लॉग को भाषाई बाध्यता की बेड़ियां तोड़ते हुए दुनिया भर के लोगों सराहनीय पहल माना. 

आप सभी को एक बार फिर स्नेह भरी बधाई. सर्प संसार के ब्लॉगरों को भी बधाई और शुभकामनाएं.' 

'सर्प संसार' के सहयोगी ब्‍लॉग 'तस्‍लीम' को भी बॉब्‍स अवार्ड में 'सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग-हिन्दी' श्रेणी का यूजर अवार्ड प्राप्‍त हुआ है। उससे जुड़े हुए सभी लोगों को भी हार्दिक बधाईयां।
 
सबसे रचनात्‍मक श्रेणी का बॉब्‍स अन्‍तर्राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार मिलने पर 'सर्प संसार' परिवार अह्लादित है। वह अपने सभी साथियों को मुबारक देता है और अपने पाठकों एवं समर्थकों का वोट के द्वारा समर्थन व्‍यक्त करने के लिए हृदय से आभार व्‍यक्‍त करता है।
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सर्पदंश से बचाव और उपचार!

कोबरा - Cobra Snake
सर्पदंश की घटनाएं अब अखबारों की सुर्खियां बनने लगी हैं. क्योंकि अब उनका प्रणय काल करीब है. गर्मी भी बढ़ रही हैं. सापों की गतिविधियाँ भी बढ़ रही हैं। इसलिए इनसे सावधान रहने की जरुरत है. भारत में जहरीले सांपो की एक बड़ी चौकड़ी है -करैत (Krait), कोबरा (Cobra), रसेल वाईपर (Russell Viper) और सा स्केल्ड वाईपर (Saw Scaled Viper). मगर ज्यादातर हिस्सों में कोबरा और करैत ही मिलते हैं. 

सांपों से बचाव के लिए...

यदि आप गावों में रहते हैं तो टॉर्च या पर्याप्त रोशनी के साथ ही बाहर जाएँ. बरसात में ख़ास तौर पर. पैरों को गम बूट ज्यादा सुरक्षा देते हैं मगर यदि आपके पास गम बूट नही है तो ऐसा जूता पहनें जो पैर को ऊपर तक अच्छी तरह ढक सके. साथ में एक डंडा और गमछा भी रखें. सापों का प्रणय- प्रजनन काल करीब है-ख़ास तौर पर नाग-कोबरा का.

कोबरा एक आक्रामक साँप है. यह अपनी टेरिटरी बना कर रहता है यानी एक ऐसा क्षेत्र जिसमें किसी को भी आने पर इसे नागवार लगता है. यदि प्रणय काल में कोई इस क्षेत्र से गुजरता है तो यह आक्रमण कर सकता है. इस पर पैर पड़ जाय तो यह काट ही लेगा.

क्या करिए अगर नागराज सहसा सामने आ जाएं?
अगर किसी की अचानक नाग से भेट हो जाय तो वह अपना गमछा या कोई भी कपडा तुरत-फुरत निकाली हुयी शर्ट या गंजी उस पर फेक दें. यह आदतन उससे उलझ लेगा और वह रफू चक्कर हो सकता है. कोबरा को लाठी से मारना ज़रा अभ्यास का काम है. लाठी तभी इस्तेमाल में लायें जब मरता क्या न करता की पोजीशन हो जाय. क्योंकि ऐसा देखा गया है कि निशाना यदि उसके मर्म स्थल [फन और इर्दगिर्द का हिस्सा] पर नही पडा और आदतन लाठी मारने वाले ने लाठी ऊपर उठायी तो वह उसके शरीर पर आ गिरेगा. और फिर वह क्रोध में काटेगा और विष भी ज्यादा निकालेगा.

विष भरे दंत:
करैत - Krait Snake
विषैले सापों में दो विषदंत आगे ही ऊपर के जबड़े में होता है और 2 विष की थैली इसी से दोनों और जुडी रहती हैं. खुदा न खास्ता साँप काट ही ले, तो धैर्य रखें, घबरा कर दौड़ न लगायें, इससे तो विष रक्त परिवहन के साथ जल्दी ही पूरे शरीर में फैल जायेगा. रूमाल, गमछा से जहाँ दंश का निशान है उसके ऊपर के एक हड्डी वाले भाग यानी पैर में काटा है तो जांघ में और हाथ में काटा है तो कुहनी के ऊपर बाँध दे, बहुत कसा हुआ नही. पुकार कर किसी को बुलाएं या धीरे धीरे मदद के लिए आसपास पहुंचे और तुंरत एंटीवेनम सूई के लिए पी एच सी पर या जिला अस्पताल पर पहुंचे.

एंटीवेनम सूई है एकमात्र इलाज (Antivenom Injection):
यह सूई अगर आसपास किसी बाजार हाट के मेडिकल स्टोर पर मिल जाय तो पहले इंट्रामस्कुलर (Intramuscular Injection) देकर अस्पताल तक पहुंचा जा सकता है, जहाँ आवश्यकता जैसी होगी चिकित्सक फिर इंट्रा वेनस दे सकता है. अगर आप के क्षेत्र में साँप काटने की घटनाएँ अक्सर होती है तो पी एच सी के चिकित्सक से तत्काल मिल कर एंटी वेनम की एडवांस व्यवस्था सुनिशचित करें- मेडिकल दूकानों पर भी इसे पहले से रखवाया जा सकता है. एंटीवेनम 10 हज़ार लोगों में एकाध को रिएक्शन करता है-कुशल चिकित्सक एंटीवेनम के साथ डेकाड्रान(Decadron)/कोरामिन(Coramin) की भी सूई साथ साथ देता है-बल्कि ऐसा अनिवार्य रूप से करना भी चाहिए। याद रखें जहरीले सांप के काटने पर कई वायल एंटीवेनम के लग सकते हैं. इसलिए इनका पहले से ही प्रयाप्त इंतजाम जरुरी है.

कैसे पहचाने कि जहरीले सांप ने काटा है?
कोबरा के काट लेने के लक्षण क्या हैं- काटा हुआ स्थान पन्द्रह मिनट के भीतर सूजने लगता है. यह कोबरा के काटे जाने का सबसे प्रमुख पहचान है. ध्यान से देखें तो दो मोटी सूई के धसने से बने निशान-विषदंत के निशान दिखेंगे. प्राथमिक उपचार में नयी ब्लेड से धन के निशान का चीरा सूई के धसने वाले दोनों निशान पर लगा कर दबा दबा कर खून निकालें और किसी के मुहँ में यदि छाला घाव आदि न हो तो वह खून चूस कर उगल भी सकता है.

विष का असर केवल खून में जाने पर ही होता है यदि किसी के मुंह में छाला, पेट में अल्सर आदि न हो तो वह सर्पविष बिना नुकसान के पचा भी सकता है. करैत जयादा खतरनाक है मगर इसके लक्षण बहुत उभर कर सामने नही आते यद्यपि थोड़ी सूजन इसमें भी होती है. करैत और कोबरा दोनों के विष स्नायुतंत्र पर घातक प्रभाव डालते हैं.

कौन ज्यादा खतरनाक? कोबरा या करैत ?
कोबरा का 12 माईक्रो ग्राम आदमी को मार सकता है मगर वह एक भरपूर दंश में 320 माईक्रोग्राम विष तक मनुष्य के शरीर में उतार सकता है. मगर प्रायः लोग पावों को तेज झटक देते हैं तो पूरा विष शरीर में नही आ पाता. इसलिए कोबरा का काटा आदमी 5-6 घंटे तक अमूमन नही मरता. और यह समय पर्याप्त है एंटीवेनम चिकित्सा के उपलब्ध होने के लिए.

समाजवादी चिकित्सा एम्बुलेंस वैन
करैत सुस्त साँप है मगर इसका 6 माइक्रोग्राम ही मौत की नीद सुला सकता है. यानी कोबरा के जहर की केवल आधी ही मात्रा.
सर्पदंश के इलाज में उत्तर प्रदेश सरकार की समाजवादी चिकित्सा एम्बुलेंस वैन बहुत प्रभावी भूमिका निभा सकती है. बस सर्पदंश की घटना घटे तो ओझा सोखा के यहाँ जाने के बजाय 108 डायल कर इसकी मदद से आप जिला अस्पताल पर एंटीवेनम चिकत्सा के लिए पहुँच सकते हैं और रोगी की शर्तिया जान बचा सकते हैं.
 दैनिक जागरण की यह खबर भी पढ़ें !
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...यह सांप है या छिपकिली?


'सर्प संसार' की एक पिछली पोस्‍ट पर एक जिज्ञासु पाठक कुंदन शर्मा ने पूछा है- "सर हमारे यहां कभी-कभी एक छिपकली जैसा लेकिन वह चलता साँप जैसा जीव दिखाई देता है उसे यहाँ हमारी स्थानीय भाषा में 'सांप की मौसी' और 'बामनी' कहते हैं। सर इसका रंग सांप जैसा चमकीला होता है सर अगर आप इसके बारे में जानते हैं तो हमें इसके बारे में और जानकारी दें।"

कुंदन शर्मा जी और और 'सर्प संसार' के पाठक गणों को मैं बताना चाहूंगा कि यह सांप तो नहीं है, हाँ दिखने में सांप और छिपकली के मध्य का जीव लगता है जो निहायत सीधा और बिना विष वाला है। वास्‍तव में यह एक छिपकिली प्रजाति की ही जीव है।  इसके काटने से जहर नहीं फैलता है। इसे कहीं कहीं बभनी भी बोलते हैं।

अंग्रेजी में यह स्किंक (Skink) कहलाती है और प्राणिशास्त्री शब्‍दावली में यह लायिगोसोमा (Lygosoma) के नाम से जानी जाती है। यह प्रमुखतः भारत में मिलती है।  इस प्यारे  से जीव के बारे में आप कुछ और जानकारी चाहते हों तो पूछ सकते हैं।
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'सर्प संसार' को वोट दें, हिन्‍दी को 'विश्‍व विजयी' बनाएं।

विश्व की 14 भाषाओं में दिया जाने वाले बॉब्स अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार के फाइनल चरण हेतु ऑनलाइन वोटिंग 03 अप्रैल से प्रारम्‍भ हो गयी है और आगामी 5 सप्ताह तक जारी रहेगी। 07 मई को विजेताओं की घोषणा की जाएगी और 18 जून को जर्मनी में पुरस्‍कार प्रदान किये जाएंगे। 
आपको बताते हुए अत्‍यंत प्रसन्‍नता हो रही है कि 'सबसे रचनात्‍मक' (Most Creative & Original) श्रेणी में 'सर्प संसार' भी नामांकित है और अब तक की वोटिंग के आधार पर नं0 01 की पोजीशन पर बना हुआ है। इस श्रेणी में एक भाषा से 01 ब्‍लॉग का चयन हुआ है और हिन्‍दी की ओर से 'सर्प संसार' को नामांकन प्राप्‍त हुआ है। इसलिए सभी मित्रों से निवेदन है कि वे इस श्रेणी में सर्प संसार को वोट करें और जर्मनी में हिन्‍दी का झंडा लहराने में मदद करें
 
इसके अतिरिक्‍त पुरस्‍कार की एक अन्‍य श्रेणी है 'हिन्‍दी का सर्वश्रेष्‍ठ ब्‍लॉग' (Best Blog Hindi)। इस श्रेणी में यूं तो कुल 10 ब्‍लॉग नामांकित हैं, किन्‍तु उसमें भी विज्ञान सम्‍बंधी तीन ब्‍लॉग हैं। सभी नामांकित ब्‍लॉगों का विवरण निम्‍नवत है:











इस श्रेणी में भी हालांकि आप सबका यह ब्‍लॉग 'सर्प संसार' भी नामांकित है, किन्‍तु चूंकि हमारा सहयोगी ब्‍लॉग 'तस्‍लीम' इस श्रेणी में नं0 01 पर विराजमान है और काफी मार्जिन से आगे है इसलिए हमारा निवेदन है कि 'हिन्‍दी का सर्वश्रेष्‍ठ ब्‍लॉग' (Best Blog Hindi) श्रेणी में 'तस्‍लीम' को अपना वोट दें और सर्वश्रेष्‍ठ ब्‍लॉग के रूप में विज्ञान का झंडा लहराएं। 



वोट करने की प्रक्रिया:

ब्राउजर में https://thebobs.com/ खोलें और 'फेसबुक', 'ट्विटर' एवं 'ओपन आईडी' के एकाउंट (के यूजरनेम और पासवर्ड का उपयोग करके) के जरिए लॉगिन हों।


लॉगिन होने के बाद अपनी श्रेणी 'हिंदी का सर्वश्रेष्‍ठ ब्‍लॉग' (Best Blog Hindi) अथवा 'सबसे रचनात्‍मक' (Most Creative & Original) का चयन करें और 'हिंदी का सर्वश्रेष्‍ठ ब्‍लॉग' (Best Blog Hindi) श्रेणी में 'तस्‍लीम' को तथा 'सबसे रचनात्‍मक' (Most Creative & Original) श्रेणी में 'सर्प संसार' को चुनें। एक बार वोट करने के बाद पेज को रिफ्रेश करलें और पुन: दूसरी श्रेणी में अपना वोट दें।
अक्‍सर यह देखने में आता है कि साइन इन करते समय करते समय कभी-कभी भाषा का पेज खुल जाता है। ऐसा होने पर साइट का यूआरएल चेक करें और उसे अपनी सुविधानुसार 
https://thebobs.com/hindi/ अथवा https://thebobs.com/english/ कर लें और तदुपरांत वोट करें।

संस्‍था द्वारा घोषित नियमावली के अनुसार हर 24 घंटे के बाद प्रत्‍येक व्‍यक्ति अपनी सेम आईडी से वोट कर सकता है, इसलिए जब तक वोटिंग बंद न हो जाए, प्रत्‍येक दिन वोट करते रहें और अपनी विज्ञान ब्‍लॉगों को अपना समर्थन देते रहें।  

क्‍या साँप अंधेरे में देख सकते हैं?

कुछ लोगों का मानना है कि साँपों की आंखें बहुत तेज होती हैं और वे उल्‍लू की तरह रात में भी देख सकते हैं। जबकि यह बात सही नहीं है। हाँ कुछ सांपों के शरीर में एक ऐसी विशेषता पाई जाती है, जिससे वे 1 मीटर तक की दूरी में आने वाले जीव को आसानी से पहचान लेते हैं। 

वैज्ञानिकों के अनुसार वाइपर (Viper), अजगर (Python) और बोआ (Boa) सांप के सिर पर दो विशेष प्रकार के छिद्र पाए जाते हैं। इन छिद्रों को पिट ऑर्गन (Pit Organ) या जेकबसंस ऑर्गन (Jacobson's Organ) कहा जाता है। इन छिद्रों के ऊपर एक पतली‍ झिल्‍ली चढ़ी होती है, जो गर्मी के प्रति बहुत संवेदनशील होती है। इस झिल्‍ली में काफी संख्‍या में तंत्रिकाएं (Nerves) पाई जाती हैं। इस कारण यह अंग तापमान और दर्द की अनुभूति करने में सक्षम होता है। 

यह झिल्‍ली विभिन्‍न जीवों के शरीर से निकलने वाली गर्मी, जोकि इन्‍फ्रारेड विकिरण (Infrared Radiation) के रूप में होती है, को बहुत आसानी से पहचान लेती है। हालांकि इस झिल्‍ली को ऊष्‍मा के स्रोत (Source of Heat) को महसूस करने में आँखों से कोई मदद नहीं मिलती है, बावजूद इसके यह उस स्रोत का एक ‘ऊष्‍मा प्रतिबिम्‍ब’ (Heat Image) बना लेती है। इससे सांप अपने पास मौजूद जीव के आकार का लगभग सही-सही अंदाजा लगा लेता है और उसके प्रति सतर्क हो जाता है। 

वैज्ञानिकों के अनुसार जब ऊष्‍मा का कोई स्रोत सांप के पास पहुंचता है, तो उसकी गर्मी से सांप के पिट आर्गन की झिल्‍ली गर्म हो जाती है। इससे झिल्‍ली में एक आयन मार्ग खुल जाता है, जिसकी वजह से तंत्रिकाओं में आयन का प्रवाह प्रारम्‍भ हो जाता है। इससे विद्युत संकेत उत्‍पन्‍न होने लगते है, जिससे सांप सामने उपस्थित जीव की आकृति पहचान लेता है। 

इसीलिए कहा जाता है कि सांप अंधेरे में भी देख लेता है। अपनी इसी क्षमता के कारण न सिर्फ सांप अपने शत्रुओं से अपनी रक्षा करने में सफल रहता है, वरन उसे शिकार करने में भी काफी मदद मिलती है।
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